भारतीय नौसेना को और ताकतवर बनाने के लिए रक्षा मंत्रालय ने 661.50 करोड़ रुपये की बड़ी डील की है। इस करार के तहत नौसेना के युद्धपोतों के लिए ब्रह्मोस के फायर कंट्रोल सिस्टम और लॉन्चर खरीदे जाएंगे। यह समझौता 6 अक्टूबर को BrahMos Aerospace Private Limited के साथ हुआ है।
दुश्मन पर नजर, फिर सटीक वार
ब्रह्मोस पहले से ही भारतीय नौसेना के कई बड़े युद्धपोतों पर तैनात है। इसकी सबसे बड़ी ताकत है इसकी तेज रफ्तार और सटीक निशाना। यह मिसाइल आवाज की गति से करीब तीन गुना तेज उड़ सकती है और समुद्र में दुश्मन के युद्धपोतों के साथ-साथ जमीन पर मौजूद अहम ठिकानों को भी निशाना बना सकती है।
फायर कंट्रोल सिस्टम क्यों खास?
अब सवाल है कि फायर कंट्रोल सिस्टम इतना जरूरी क्यों है? दरअसल, यह युद्धपोत के सेंसर, कमांड सिस्टम और मिसाइल लॉन्चर के बीच कड़ी का काम करता है। यानी दुश्मन के टारगेट की पहचान से लेकर मिसाइल को सही दिशा में लॉन्च करने तक इसकी बड़ी भूमिका होती है।
पाकिस्तान और चीन पर भी नजर
हिंद महासागर में पाकिस्तान और चीन की नौसैनिक गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं। पाकिस्तान को चीन से युद्धपोत और पनडुब्बियां मिल रही हैं, वहीं चीनी नौसेना भी हिंद महासागर में अपनी मौजूदगी बढ़ा रही है। ऐसे में भारत के लिए समुद्री मोर्चे पर अपनी ताकत मजबूत रखना बेहद जरूरी है।
अरब सागर में बढ़ेगी स्ट्राइक पावर
ब्रह्मोस के नए सिस्टम और लॉन्चर भारतीय युद्धपोतों की समुद्र में तेजी से जवाब देने की क्षमता को और मजबूत करेंगे। खासकर अरब सागर में किसी भी समुद्री चुनौती के दौरान भारतीय नौसेना को दूर से सटीक वार करने में मदद मिलेगी।
68 फीसदी से ज्यादा स्वदेशी हिस्सा
इस डील की खास बात सिर्फ इसकी कीमत नहीं है। इसे Buy Indian-IDDM कैटेगरी के तहत किया गया है और इसमें 68 फीसदी से ज्यादा स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल होगा। इससे देश की घरेलू कंपनियों और MSME सेक्टर को भी बड़ा फायदा मिलेगा।
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आत्मनिर्भर भारत को ताकत
यानी 661 करोड़ की यह डील सिर्फ मिसाइल और लॉन्चर खरीदने तक सीमित नहीं है। एक तरफ भारतीय नौसेना की समुद्री ताकत बढ़ेगी, तो दूसरी तरफ देश की अपनी डिफेंस इंडस्ट्री और स्वदेशी तकनीक को भी बड़ा बूस्ट मिलेगा।

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