केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मणिपुर को एक बार फिर पूरी तरह अशांत क्षेत्र घोषित कर दिया है। इसके साथ ही राज्य में AFSPA यानी आर्म्ड फोर्सेज स्पेशल पावर्स एक्ट को अगले छह महीने के लिए बढ़ा दिया गया है। गृह मंत्रालय ने शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 को इस संबंध में नोटिफिकेशन जारी किया है। नया आदेश 1 अक्टूबर 2026 से लागू होगा और अगले छह महीने तक जारी रहेगा।
13 पुलिस थाना क्षेत्र AFSPA से बाहर
हालांकि, मणिपुर के पांच जिलों के 13 पुलिस थाना क्षेत्रों को इस बार AFSPA के दायरे से बाहर रखा गया है। इनमें इंफाल के लांफेल, सिटी, सिंगजामेई, पटसोई, वांगोई, पोरोमपत, हेइंगांग और इरिलबुंग शामिल हैं। इसके अलावा थौबल, बिष्णुपुर, नांबोल और काकचिंग थाना क्षेत्र भी इस कानून से बाहर रहेंगे। गृह मंत्रालय ने कहा है कि हालात की समीक्षा के बाद इसे तय समय से पहले भी हटाया जा सकता है।
नागालैंड के 9 जिले भी अशांत घोषित
मणिपुर के साथ ही नागालैंड में भी AFSPA को अगले छह महीने के लिए बढ़ाया गया है। गृह मंत्रालय ने नागालैंड के 9 पूरे जिलों को अशांत क्षेत्र घोषित किया है। इनमें दीमापुर, निउलैंड, चुमौकेदिमा, मोन, किफिरे, नोकलक, फेक, पेरेन और मेलुरी शामिल हैं। यह आदेश 1 अक्टूबर 2026 से लागू होगा।
5 जिलों के 21 थाना क्षेत्र भी दायरे में
इसके अलावा नागालैंड के पांच और जिलों के 21 पुलिस थाना क्षेत्रों को भी AFSPA के तहत अशांत क्षेत्र घोषित किया गया है। इनमें कोहिमा, मोकोकचुंग, लोंगलेंग, वोखा और जुन्हेबोटो के कुछ इलाके शामिल हैं। गृह मंत्रालय ने यह फैसला कानून-व्यवस्था की स्थिति की समीक्षा के बाद लिया है।
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कोहिमा और मोकोकचुंग में ये इलाके शामिल
कोहिमा जिले में खुजामा, कोहिमा नॉर्थ, कोहिमा साउथ, जुब्जा और केजोक्हा थाना क्षेत्र AFSPA के दायरे में होंगे। वहीं मोकोकचुंग में मंगकोलेंबा, मोकोकचुंग-I, लोंगथो, तुली, लोंगचेम और अनाकी ‘C’ थाना क्षेत्र शामिल हैं।
लोंगलेंग, वोखा और जुन्हेबोटो के इलाके
लोंगलेंग जिले में यांगलोक थाना क्षेत्र को अशांत क्षेत्र घोषित किया गया है। वोखा में भंडारी, चंपांग और रालान थाना क्षेत्र इसके दायरे में हैं। वहीं जुन्हेबोटो में घाटाशी, पुघोबोटो, सताखा, सुरुहुटो, जुन्हेबोटो और अघुनाटो थाना क्षेत्र शामिल हैं।यानी 1 अक्टूबर 2026 से मणिपुर और नागालैंड के इन इलाकों में AFSPA लागू रहेगा। हालांकि, गृह मंत्रालय ने साफ किया है कि अगर हालात में सुधार होता है तो सरकार छह महीने पूरे होने से पहले भी इस फैसले की समीक्षा कर सकती है।

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